बुलाकर भगा दूंगा फिरकी के तरह नचा दूंगा

एक दिन की बात है एक छोटा-सा बालक मेरे पास आया और बोलै -“गुरु जी ! मेरी माँ ने आपके पास भेजा है !!

आगे कहो !

“मेरी दीदी कल कपडे बदल कर बाजार गयी थी, अभी तक लौटकर नहीं आयी है”!

“आ जाएगी”..मैंने कहा. उसके उतारे हुए कपड़े और इन सामग्रियों को लेते आना.. ऐसा कहकर मैंने सामग्री कि लिस्ट लिख कर थमा दी.
वह बालक ही आया लेकिन उसके माता पीता नहीं आये..खैर जो भी हो..कपडे और सामग्री के साथ दक्षिणा द्रव्य साथ लाया था.
वैसे भी बिना दक्षिणा का शुभ फल मिलता भी किसे है.
मैंने सामग्री सिद्ध कर और प्रयोग करने कि विधि लिखकर तीन घंटे बाद बुलाया..वो सामग्री और प्रयोग विधि लेकर गया.

तीन दिन बाद –

गुरु जी !! वो शहर में वापस आ चुकी है.. पर घर वापस नहीं आ रही है ! वह किसी लड़के के साथ है ! पिता जी ने कहा है कि दोनों को अलग करवा दो.. जो खर्च आएगा.. वो देंगे !
अगली सामग्री भी तैयार की गयी और जो हुआ होगा उसका अनुमान लगाया जा सकता है.
बस इतनी सी बात समझ लेनी चाहिए कि..तंत्र शास्त्र और शस्त्र वो शक्ति है जिसका समुचित प्रयोग सटीक विधि से किया जाये तो यह अमोघ और अचूक फलदायी होता है.

यह घटना है..??पाड़ा, पाकुड़, झारखण्ड का

एक संस्मरण : मुकुंद

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